Thursday, September 6, 2012


भिक्षा देदे माई भिक्षा देदे माई
तेरे द्वार पे चलके आया शिरडी वाला साँई
भिक्षा देदे माई

चिमटा कटोरा सटका लेकर भिक्षा माँगने आए
तू दे न दे फिर भी साँई आशिष दे कर जाए
भिक्षा देदे माई

देवे भिक्षा उसको साँई दस पट कर लौटाए
ना भी दे तो हरपल साँई उसका भार उठाए
भिक्षा देदे साँई

दान धरम से भोग है कटता यह बतलाने आए
एक इशारा हो जाए उसका भव से तू तर जाए
भिक्षा देदे माई

रूप बदलना आदत उसकी घर भक्तों के जाए
रोटी टुकड़ा भिक्षा मांगे असली रूप छिपाए
भिक्षा देदे माई

तेरे द्वार पे चलकर आया शिरडी वाला साँई
भिक्षा देदे माई
 

aaj kaa sai sandesh



तुझको दी धडकनें सांस के वास्ते  |
तुझको आँखों के तोहफे दिए इसलिए  -
अपने खालिक की रहमत को देखे सदा |
तुझको सब कुछ मिला

 
 
तुझको आवाज़ दी नाम लेता रहे |
साईं विश्वास से काम लेता रहे |
रोशनी के लिए तुझको दी आत्मा |
तुझको सब कुछ मिला
 
तुझको बदल दिए ताकी बरखा मिले |
साईं छाया मिली ताकी रक्षा मिले |
कहेदो दिन के पतझड़ से घबरा गया |
तुझको सब कुछ मिला
 
हादसे भी दिए, हौसले भी दिए |
तुझको दिन मुश्किलें, रास्ते भी दिए |
दूर मंजिल सही, कम हुआ फासला  |
तुझको सब कुछ मिला
 
खुद-ब-खुद पायेगा जिसका हक़दार है |
किस समय कौन-सी चीज़ दरकार है |
क्या बताएगा तू, उसको है सब पता |
तुझको सब कुछ मिला
 
इस अदालत में कानून तेरा नहीं |
कौन-सा दुःख है जिसका सवेरा नहीं |
दिल से हर दम किये जा यही इक दुआ |
तुझको सब कुछ मिला

Wednesday, September 5, 2012

aaj kaa sai sandesh


श्री साई की इच्छा के बिना कोई भक्त उनके पास पहुँच ही न सकता था। यदि उनके शुभ कर्म उदित नहीं हुए है तो उन्हें बाबा की स्मृति भी कभी नहीं आई और न ही उनकी लीलायें उनके कानों तक पहुँच सकी। तब फिर बाबा के दर्शनों का विचार भी उन्हें कैसे आ सकता था? अनेक व्यक्तियों की श्री साईबाबा के दर्शन की इच्छा होते हुए भी उन्हें बाबा के महासमाधि लेने तक कोई योग प्राप्त न हो सका। अतः ऐसे व्यक्ति जो दर्शनलाभ से वंचित रहे है, यदि वे श्रद्घापूर्वक साईलीलाओं का श्रवण करेंगे तो उनकी साई-दर्शन की इच्छा बहुत कुछ सीमा तक तृप्त हो जायेगी। भाग्यवश यदि किसी को किसी प्रकार बाबा के दर्शन हो भी गये तो वह वहाँ अधिक ठहर न सका। इच्छा होते हुए भी केवल बाबा की आज्ञा तक ही वहाँ रुकना संभव था और आज्ञा होते ही स्थान छोड़ देना आवश्यक हो जाता था। अतः यह सब उनकी शुभ इच्छा पर ही अवलंबित था।

Monday, September 3, 2012

jai sai ram


श्री साई की इच्छा के बिना कोई भक्त उनके पास पहुँच ही न सकता था। यदि उनके शुभ कर्म उदित नहीं हुए है तो उन्हें बाबा की स्मृति भी कभी नहीं आई और न ही उनकी लीलायें उनके कानों तक पहुँच सकी। तब फिर बाबा के दर्शनों का विचार भी उन्हें कैसे आ सकता था? अनेक व्यक्तियों की श्री साईबाबा के दर्शन की इच्छा होते हुए भी उन्हें बाबा के महासमाधि लेने तक कोई योग प्राप्त न हो सका। अतः ऐसे व्यक्ति जो दर्शनलाभ से वंचित रहे है, यदि वे श्रद्घापूर्वक साईलीलाओं का श्रवण करेंगे तो उनकी साई-दर्शन की इच्छा बहुत कुछ सीमा तक तृप्त हो जायेगी। भाग्यवश यदि किसी को किसी प्रकार बाबा के दर्शन हो भी गये तो वह वहाँ अधिक ठहर न सका। इच्छा होते हुए भी केवल बाबा की आज्ञा तक ही वहाँ रुकना संभव था और आज्ञा होते ही स्थान छोड़ देना आवश्यक हो जाता था। अतः यह सब उनकी शुभ इच्छा पर ही अवलंबित था।

jai sai ram


sai pranam


Saturday, September 1, 2012

JAI SHRI SHYAM


sai bhaktidhara

जगत के रंग क्या देखू ,तेरा दीदार काफी है ,
                                                   करू मैं प्यार किस किस से तेरा एक प्यार काफी है ,
                                                    नहीं चाहिए ये दुनिया के निराले रंग ढंग मुझको ,
                                                        चला आऊ मैं शिर्डी तेरा दरबार काफी है ,
                                                                 जगत के रंग क्या देखू .....
                                                           अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाए जा.....
                                                           अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाए जा......
                                                ओ मेरे शिर्डी वाले अपनी ही धुन में मुझे मिलाये जा

                               ॐ साईं राम जय साईं राम ....................


Thursday, August 30, 2012

SAI SANDESH

एक दिन दोपहर की आरती के पश्चात भक्तगण अपने...
एक दिन दोपहर की आरती के पश्चात भक्तगण अपने घरों को लौट रहे थे, तब बाबा ने निमिन्लिखित सुन्दर उपदेश दिया :
" तुम चाहे कहीं भी रहो, जो इच्छा हो, सो करो, परन्तु यह सदैव स्मरण रखो की जो कुछ तुम करते हो, वह सब मुझे ज्ञात है. मई ही समस्त प्राणियों का प्रभु और घाट - घाट में व्याप्त हूँ. मेरे ही उदार में समस्त जड़ व चेतन प्राणी समाये हुए हैं. मै ही समस्त ब्रह्माण्ड का नियन्त्रनकर्ता व संचालक हूँ. मैं ही उतपत्ति ,स्थिति व संहारकर्ता हूँ. मेरी भक्ति करने वालों को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता. मेरे ध्यान की उपेक्षा करने वाला, माया के पाश में फँस जाता है. समस्त जन्तु, चीटियाँ तथा दृश्यमान , परिवर्तमान और स्थायी विश्व ही मेरा स्वरुप है." om sai ram to all, love

pls join hands


Om Sai Ram with the Blessing Of Sai Baba We are Going Telecaste TODAY DOING LIVE FROM DELHI VISHAL SAI BHAJAN SANDHYA SUNG BY SURENDER SAXENA(SAXENABANDHU) CO-09654858202 WATCH LIVE LOG ON www .sai-bhaktidhara.blogspot.in

Sai Bhakti Dhara Live